दिमागी बीमारी से बचना होगा आसान

दिमागी बीमारी से बचना होगा आसानदिमागी बीमारी से बचना होगा आसान

टोरंटो, प्रेट्र। समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में आगे चलकर कई तरह की बीमारी होने का खतरा रहता है। इनमें दिमागी बीमारी होने की आशंका प्रबल रहती है। कनाडाई शोधकर्ताओं ने इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने ब्रेन मैपिंग या स्कैनिंग के जरिये भविष्य में होने वाली विकलांगता के बारे में पता लगाने का दावा किया है। इससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा।

निर्धारित समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों (खासकर 31 सप्ताह से पहले) के मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली समस्या बेहद आम है। इसके कारण व्हाइट मैटर क्षतिग्रस्त हो जाता है। नर्व फाइबर्स व्हाइट मैटर में ही होते हैं। इसकी मदद से दिमाग के विभिन्न हिस्से आपस में जुड़े रहते हैं

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ऐसे में व्हाइट मैटर के क्षतिग्रस्त होने पर मस्तिष्क की संचार व्यवस्था भी प्रभावित होती है, लिहाजा दिमाग द्वारा शरीर के अन्य हिस्सों में भेजे जाने वाले संकेत में गड़बड़ी पैदा हो जाती है। ऐसे नवजात में सोचने-समझने की क्षमता में कमी और शारीरिक गतिविधियों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन स्कैनिंग से व्हाइट मैटर में गड़बड़ी का पता चल जाता है। ऐसे में शुरुआत में इसका समुचित इलाज संभव हो सकता है।

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