एम्स में इलाज शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर डॉक्टरों का विरोध

एम्स में इलाज शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर डॉक्टरों का विरोधएम्स में इलाज शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर डॉक्टरों का विरोध एम्स ने केंद्र सरकार से गैर योजनागत मद में करीब 300 करोड़ की राशि की मांग की थी। डॉक्टरों व कर्मचारियों के वेतन और मरीजों की दवाओं आदि के लिए बजट कम पड़ जाता है।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। एम्स में इलाज शुल्क बढ़ाने के वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव को एम्स के डॉक्टरों ने नकार दिया है। इसलिए प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया गया है। नए निदेशक की नियुक्ति के बाद इस मामले पर विचार हो सकता है। एम्स के ज्यादातर विभागों के डॉक्टर इलाज शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में हैं।

एम्स ने केंद्र सरकार से गैर योजनागत मद में करीब 300 करोड़ की राशि की मांग की थी। डॉक्टरों व कर्मचारियों के वेतन और मरीजों की दवाओं आदि के लिए बजट कम पड़ जाता है। एम्स प्रशासन के अनुसार, संस्थान की मांग को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय ने इलाज शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया था, क्योंकि 20 वर्षो से एम्स में ओपीडी कार्ड, कई जांच व सर्जरी का शुल्क नहीं बढ़ा है। एम्स को हर साल ओपीडी कार्ड शुल्क, जांच व सर्जरी के शुल्क से करीब 100 करोड़ का राजस्व मिलता है। मंत्रालय का सुझाव था कि यदि इलाज के शुल्क का निर्धारण नए सिरे से कर दिया जाए तो एम्स अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है और गैर योजनागत मद में ज्यादा बजट बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए एम्स में एक कमेटी गठित की गई थी। जिसमें कई विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल थे।

संस्थान के डॉक्टरों के अनुसार कमेटी की बैठक में ज्यादातर विभागाध्यक्षों ने शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना है कि एम्स में ज्यादातर गरीब मरीज आते हैं। इन मरीजों के लिए एम्स ही सहारा है। यदि इलाज शुल्क बढ़ा दिया तो यह उनके लिए उचित नहीं होगा।

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