मुंबई। जब भी कोई स्टार किड बॉलीवुड में लांच होने वाला होता है तो नेपोटिज़्म या परिवारवाद की बहस तेज़ होने लगती है। हाल ही में जब शाह रुख़ ख़ान की बेटी सुहाना ने एक्टिंग में करियर बनाने की ख़्वाहिश एक इंटरव्यू में ज़ाहिर की और उनका पहला प्रोफेशनल फोटोशूट वायरल हुआ तो नेपोटिज़्म की आवाज़ें सोशल मीडिया में उठने लगीं। सुहाना को ट्रोल करने की कोशिश की गयी।

हाल ही में जब सलमान ख़ान ने अपने बहनोई आयुष शर्मा की डेब्यू फ़िल्म ‘लवरात्रि’ का ट्रेलर रिलीज़ किया तो फिर नेपोटिज़्म की बहस ने सिर उठाया। इससे पहले श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर को ‘धड़क’ की रिलीज़ से पहले नेपोटिज़्म के बारे में चुभते सवाल सुनने पड़े। बहरहाल, बॉलीवुड में इस समय कई स्टार किड्स अपनी पारी खेलने का इंतज़ार कर रहे हैं और आने वाले समय में वो पर्दे पर दिखायी देंगे। इसके साथ-साथ नेपोटिज़्म की बहस भी चलती रहेगी। इस बार यह बहस के एक छोर पर जैकी श्रॉफ की पत्नी और टाइगर श्रॉफ की मॉम आएशा श्रॉफ खड़ी हैं तो दूसरे छोर पर एकता कपूर खड़ी हैं, जिनकी एक इंस्टाग्राम पोस्ट से नेपोटिज़्म की बहस छिड़ गयी है। 

इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘लैला मजनू’ का फ़र्स्ट लुक हाल ही में आया है। इस फ़िल्म को एकता कपूर ने प्रोड्यूस किया है। फ़िल्म से दो नए और युवा कलाकार अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी डेब्यू कर रहे हैं। ‘लैला-मजनू’ की मशहूर लोककथा पर यह मॉडर्न टेक है। फ़िल्म का फ़र्स्ट लुक शेयर करते हुए एकता ने लिखा- ”प्रोमो दो घंटे में आने वाला है। समय की सीमाओं से परे मासूम प्यार की इस कहानी पर बनी फ़िल्म की झलक ज़रूर देखिए, जिस पर व्यावसायिकता हावी नहीं हुई है।” यहां तक तो ठीक था, मगर इसके बाद एकता ने नेपोटिज़्म के मुद्दे को ख़ुद यह कहते हुए उछाल दिया कि इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म में बतौर लीड रोल दो नए चेहरों को मौक़ा दिया गया है, जिनके पीछे कोई फ़िल्मी विरासत या स्टार पिता या गॉडफादर नहीं है। एकता की पोस्ट का स्क्रीन शॉट आप नीचे देख सकते हैं- 

एकता के इस तंज पर तमाम कमेंट्स आए। इन्हीं में से एक आएशा श्रॉफ का था, जिन्होंने लिखा- ”स्टार पिता होना कोई पाप नहीं है। कड़ी मेहनत और हुनर तो सभी को दिखाना पड़ता है, चाहे कोई जाति, समुदाय या वंश हो।” एकता ने आएशा की इस बात से नाइत्तेफ़ाक़ी जताते हुए बाहरी लोगों को मौक़ा देने की वक़ालत की। एकता ने लिखा- ”यह सही नहीं है मैम। मेरे पास एक है। लेकिन आपको यह बात तो माननी पड़ेगी कि निर्माता के लिए वो फ़िल्म बेचना आसान होता है, जिससे कोई लाइनेज या वंश का नाम जुड़ा होता है। यह किसी स्टार किड को नीचा दिखाने के लिए नहीं है, कम से कम टाइगर के लिए तो नहीं, क्योंकि वो बेहद शानदार हैं। बस एक प्रार्थना है कि दूसरे बच्चों को भी मौक़ा दिया जाना चाहिए।” आएशा और एकता के बीच हुई बातचीत का स्क्रीन शॉट नीचे देख सकते हैं-

 

वैसे एकता की हिम्मत को दाद देनी होगी। वो ख़ुद एक ऐसे परिवार से आती हैं, जिसका फ़िल्म इंडस्ट्री से गहरा रिश्ता है। एकता सुपरस्टार जीतेंद्र की बेटी हैं और तुषार कपूर की बहन हैं। एकता शायद जानती हैं कि नेपोटिज़्म के बावजूद कई स्टार किड्स नहीं चल पाते। वैसे एकता ने छोटे पर्दे  के ज़रिए कई ऐसे कलाकारों को मौक़ा दिया है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं और इंडस्ट्री से कोई रिश्ता नहीं था। इनमें सुशांत सिंह राजपूत, अंकिता लोखंडे, मौनी रॉय जैसे नाम शामिल हैं। ‘लैला मजनू’ 7 सितम्बर को रिलीज़ होने वाली है। 

By Manoj Vashisth